Wednesday, May 23, 2007

मुसकुराती सुबह लिखना

मुसकुराती सुबह लिखना खिलखिलाती शाम लिखना
ज़िन्दगी का बस यही अंदाज़ मेरे नाम लिखना

कोई नहीं किसी का हर शख्स यहाँ है तन्हा
हो बात हमसफ़र की तो पहले मेरा नाम लिखना

मैं जिसको गुनगुनाऊं तो रूह तेरी महके
लिखना तो ऐसा नग्मा दिल शादकाम लिखना

जो लोग आदमी को पैसों से तोलते हैं
बिक जायेंगे वो इक दिन कौड़ी के दाम लिखना

मज़हब के नाम है जो सब फ़र्क वो मिटा दो
मैंने सलाम भेजा तुम राम राम लिखना

अहसास मोहब्बत का हो चंद्र सबको ऐसे
दुश्मन के ज़ाम में भी अमृत का नाम लिखना

1 comments:

Raviratlami said...

चन्द्रकुमार जी आपकी रचनाएँ बेहद अच्छी हैं.
मुझे पहचाना?

हम दिग्विजय कॉलेज में बीएससी का पहला साल साथ में पढ़े थे?....