ज़िन्दगी का बस यही अंदाज़ मेरे नाम लिखना
कोई नहीं किसी का हर शख्स यहाँ है तन्हा
हो बात हमसफ़र की तो पहले मेरा नाम लिखना
मैं जिसको गुनगुनाऊं तो रूह तेरी महके
लिखना तो ऐसा नग्मा दिल शादकाम लिखना
जो लोग आदमी को पैसों से तोलते हैं
बिक जायेंगे वो इक दिन कौड़ी के दाम लिखना
मज़हब के नाम है जो सब फ़र्क वो मिटा दो
मैंने सलाम भेजा तुम राम राम लिखना
अहसास मोहब्बत का हो चंद्र सबको ऐसे
दुश्मन के ज़ाम में भी अमृत का नाम लिखना
कोई नहीं किसी का हर शख्स यहाँ है तन्हा
हो बात हमसफ़र की तो पहले मेरा नाम लिखना
मैं जिसको गुनगुनाऊं तो रूह तेरी महके
लिखना तो ऐसा नग्मा दिल शादकाम लिखना
जो लोग आदमी को पैसों से तोलते हैं
बिक जायेंगे वो इक दिन कौड़ी के दाम लिखना
मज़हब के नाम है जो सब फ़र्क वो मिटा दो
मैंने सलाम भेजा तुम राम राम लिखना
अहसास मोहब्बत का हो चंद्र सबको ऐसे
दुश्मन के ज़ाम में भी अमृत का नाम लिखना

1 comments:
चन्द्रकुमार जी आपकी रचनाएँ बेहद अच्छी हैं.
मुझे पहचाना?
हम दिग्विजय कॉलेज में बीएससी का पहला साल साथ में पढ़े थे?....
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