उठो साथी हर कदम आलोक करना है
शान्ति से हर एक घर का चौक भरना है
व्यक्तिगत सुख का हमें बलिदान करके भी
तड़पती हर जिंदगी का शोक हरना है .
Thursday, March 6, 2008
उठो साथी ...
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उठो साथी हर कदम आलोक करना है
शान्ति से हर एक घर का चौक भरना है
व्यक्तिगत सुख का हमें बलिदान करके भी
तड़पती हर जिंदगी का शोक हरना है .
1 comments:
यह मुक्तक भी बहुत बढिया है। बधाई।
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