
मन का आँगन देखो प्रमुदित
उन्नत और निहाल हो गया !
लो बसंत आया अनुशासन
मन का एक सवाल हो गया !
बौराई अमराई, धरती धन्य
सगाई को आतुर है
आए हैं ऋतुराज लाज में
टेसू जैसा गाल हो गया !
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जिसकी तमाम लोक में, कोई नहीं सानी।
भारत है मेरा देश, शहीदों की निशानी ।।
जो मीर,सूर तुलसी, कबीरा का गीत है,
जो राम,कृष्ण,गाँधी, गौतम का मीत है।
सुभाष,भगत सिंह,उधम सिंह की जननी,
आजाद हिंद फौज की ये परमजीत है।।
मिलते हैं यहाँ कर्ण, हरिश्चंद्र से दानी।
भारत है मेरा देश,शहीदों की निशानी।।
माटी जहाँ की सोना, चाँदी का गगन है,
कश्मीर की घाटी तो ज़न्नत का चमन है।
शेरों की दहाडों से जहाँ मौत काँपती,
वो मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है ।।
क़ुर्बान है हर वक़्त जहाँ जोश-ए-जवानी,
भारत है मेरा देश, शहीदों की निशानी।।
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आँखों को मुस्कानअगर मिल जाए
पाँवों को उड़ान
अगर मिल जाए
दूर न होगा शिखर
कभी जीवन में
संकल्पों को जान
अगर मिल जाए
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वही युवा है जिसके मन में
महफ़िल में हँसी-ठहाकों केमंज़र अक़्सर मिलते हैं पर
सूने घर में रोने वाले
मेरे सपनों में आते हैं
अपनी ही दुनिया में खोए
खुदगर्ज़ मिले अनगिन लेकिन
खो बैठे जो अपनी दुनिया
वो मुझको रोज़ बुलाते हैं
इस पार रुकूँ कैसे मैं मन !
उस पार जो जीवन ठहरा है
मैं उनकी गति बन जाऊँ जो
थककर पथ पर रुक जाते हैं...!
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