
हम मीर से कहते हैं तू न रोया कर
हँस-खेल के टुक चैन से भी सोया कर
- मीर तकी 'मीर'
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जब आए थे तो रोते हुए आए थे
अब जायेंगे, औरों को रुला जायेंगे
- अब्राहिम ज़ौक
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दुःख जी को पसंद आ गया है ग़ालिब
दिल रूककर बंद हो गया है ग़ालिब
- मिर्ज़ा ग़ालिब
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रोया करेंगे आप भी पहरों इसी तरह
अटका कहीं जो आपका दिल भी मेरी तरह
- मोमिन खां 'मोमिन'
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परवरदिगार ही तो है, गुल दे कि खार दे
जी चाहे जिस तरह वो चमन को बहार दे
- हीरालाल 'फ़लक'
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आदमी हूँ गुनाह करता हूँ
इसमें ऐ रब मेरी खता क्या है
- कृष्णकुमार 'चमन'
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पंछी उड़े तो सूखे हुए पेड़ ने कहा
रुत फिर गयी तो ये भी मुझे छोड़कर चले
- नौबहार 'साबिर'
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