मैंने तुम्हारे दुःख सेअपने को जोड़ा
और
अकेला हो गया
मैंने तुम्हारे सुख से
अपने को जोड़ा
और
छोटा हो गया
मैंने सुख-दुःख से परे
अपने को तुमसे जोड़ा
और
अर्थहीन हो गया
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सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता साभार
भगवान से प्रार्थना कीजिए,याचना नहीं।
तू भी मेरी ही तरह कुछ अपने दिल की बात लिख दिन अगर है दिन ही लिख गर रात है तो रात लिख
मैं समझता हूँ मोहब्बत का हर एक ग़म और फरेब
मुझको अपनी दास्तां लिख दिल के सब ज़ज़्बात लिख
क़ैद हैं तेरे भी दिल में सैकड़ों ग़ज़लें कहीं
आ कलम क़ागज़ उठा लिखने की कर शुरूआत लिख
एक आँसू ज़िंदगी है एक आँसू मौत है
ज़िंदगी की बूँद लिख और मौत की बरसात लिख
यूँ न कर दुनिया की बातें दर्द को होंठों पे ला
दिल में है ग़म का समंदर तू उसी की बात लिख
तू मुझे अच्छा बना मेरी बुराई कह मुझे
दोस्त है तो दे मुझे ऐसी कोई सौगात लिख
आज भी मातम जहाँ है ज़िंदगी वीरान है
जा उन्हीं के झोपड़ों में उनके भी हालात लिख
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श्री राजमोहन चौहान की ग़ज़ल साभार प्रस्तुत

जो जैसा सोचते करते हैं वैसा कुछ नहीं होता
अगर होता भी है तो उनके हक़ में कुछ नहीं होता
हैं दौलत के भंवर में डूबने तैयार सब लेकिन
कभी नदी नहीं होती कभी मौका नहीं होता
न गलती है न धोखा है सरासर ये हिमाकत है
यों सब कुछ जानकर हठ पालना धोखा नहीं होता
बढ़ाती जा रही है पैठ नफरत दिलों तक लेकिन
मुश्किल ये है खुल के सभी का मिलना नहीं होता
दिखाएँगे कहाँ तक रोशनी ये चाँद-सूरज भी
अगर इंसान में ही नूर ख़ुद पैदा नहीं होता
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श्री महेंद्र सिंह की ग़ज़ल साभार प्रस्तुत