Saturday, November 7, 2009

रिश्ते की खोज...!

मैंने तुम्हारे दुःख से
अपने को जोड़ा
और
अकेला हो गया
मैंने तुम्हारे सुख से
अपने को जोड़ा
और
छोटा हो गया
मैंने सुख-दुःख से परे
अपने को तुमसे जोड़ा
और
अर्थहीन हो गया
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सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता साभार

Thursday, October 22, 2009

अपनी एक कहानी है.

चलते-चलते पाँव थक गए बिना बिचारे बैठ गए
जो प्यासे थे घुटनों के बल नदी किनारे बैठ गए
अंधियारे के तालमेल की अपनी एक कहानी है
दिन वाले सूरज के घर में रात सितारे बैठ गए
बैठे हैं कुछ लोग इस तरह लोकतंत्र की छाया में
जैसे किसी पेड़ के नीचे कुछ बंजारे बैठ गए
चिड़िया सी ज़िंदगी उड़ानें भरती नहीं फिज़ाओं में
छिपकर किसी नींद पर कुछ सुकुमार सहारे बैठ गए
अमन चैन खुदकशी कर रहा है खेतों की मेड़ों पर
जब से गंवई पंचायत में कुछ हत्यारे बैठ गए
देशी ताल विदेशी बगुलों की चाहत में जीता है
मछली बिना शिकार-शिकारी कांटा मारे बैठ गए
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प्रभा दीक्षित,कानपुर की ग़ज़ल...देशबंधु से साभार

Monday, October 19, 2009

प्रतीक्षा....!

यात्रा में प्रतीक्षा आम बात है
लेकिन
दुनिया में ऐसे लोग भी तो हैं
जिनके हिस्से में
प्रतीक्षा ही यात्रा है
प्रतीक्षा....
चुटकी भर सुख,सुकून,इत्मीनान की !
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Sunday, October 18, 2009

प्रार्थना करें,याचना नहीं...!

भगवान से प्रार्थना कीजिए,याचना नहीं।
आपकी स्थिति ऐसी नहीं कि
कमजोरियों के कारण
किसी का मुँह ताकना पड़े
और याचना के लिए हाथ फैलाना पड़े
प्रार्थना कीजिए कि
मेरा प्रसुप्त आत्मबल जागृत हो
प्रकाश का दीपक जो विद्यमान है
वह टिमटिमाए नहीं
वरन रास्ता दिखाने की स्थिति में बना रहे
मेरा आत्मबल मुझे धोखा न दे
समग्रता में न्यूनता का भ्रम न होने दे
जब परीक्षा लेने और शक्ति निखारने हेतु
संकटों का झुंड आए
तब मेरी हिम्मत बनी रहे
और जूझने का उत्साह भी
लगता रहे कि ये बुरे दिन
अच्छे दिनों की सूचना देने आए हैं
प्रार्थना कीजिए कि हम हताश न हों
लड़ने की सामर्थ्य को
पत्थर पर घिसकर धार रखते रहें
योद्धा बनने की प्रार्थना करनी है
भिक्षुक बनने की नहीं
जब अपना भिक्षुक मन गिड़गिडाए
तो उसे दुत्कार देने की प्रार्थना भी
भगवान से करते रहें।
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अखंड ज्योति से साभार प्रस्तुत.

Monday, October 5, 2009

काम की हद तक हमारा काम है...!

कामयाबी के नहीं हम जिम्मेदार
काम की हद तक हमारा काम है
ज़ब्र उस मुख्तार पर क्यों कर करें
अर्ज़ कर देना हमारा काम है
हुस्ने सूरत को नहीं कहते हैं हुस्न
हुस्न तो हुस्ने अमल का नाम है
रह सके किस तरह अमजद मुतमईन
ज़िंदगी खौफ़े खुदा का नाम है
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अमजद हैदराबादी की ग़ज़ल साभार प्रस्तुत.

Saturday, September 26, 2009

दिल के सब ज़ज़्बात लिख.

तू भी मेरी ही तरह कुछ अपने दिल की बात लिख

दिन अगर है दिन ही लिख गर रात है तो रात लिख

मैं समझता हूँ मोहब्बत का हर एक ग़म और फरेब

मुझको अपनी दास्तां लिख दिल के सब ज़ज़्बात लिख

क़ैद हैं तेरे भी दिल में सैकड़ों ग़ज़लें कहीं

आ कलम क़ागज़ उठा लिखने की कर शुरूआत लिख

एक आँसू ज़िंदगी है एक आँसू मौत है

ज़िंदगी की बूँद लिख और मौत की बरसात लिख

यूँ न कर दुनिया की बातें दर्द को होंठों पे ला

दिल में है ग़म का समंदर तू उसी की बात लिख

तू मुझे अच्छा बना मेरी बुराई कह मुझे

दोस्त है तो दे मुझे ऐसी कोई सौगात लिख

आज भी मातम जहाँ है ज़िंदगी वीरान है

जा उन्हीं के झोपड़ों में उनके भी हालात लिख

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श्री राजमोहन चौहान की ग़ज़ल साभार प्रस्तुत

Tuesday, September 22, 2009

इंसान में ही नूर ख़ुद पैदा नहीं होता...!


जो जैसा सोचते करते हैं वैसा कुछ नहीं होता

अगर होता भी है तो उनके हक़ में कुछ नहीं होता

हैं दौलत के भंवर में डूबने तैयार सब लेकिन

कभी नदी नहीं होती कभी मौका नहीं होता

न गलती है न धोखा है सरासर ये हिमाकत है

यों सब कुछ जानकर हठ पालना धोखा नहीं होता

बढ़ाती जा रही है पैठ नफरत दिलों तक लेकिन

मुश्किल ये है खुल के सभी का मिलना नहीं होता

दिखाएँगे कहाँ तक रोशनी ये चाँद-सूरज भी

अगर इंसान में ही नूर ख़ुद पैदा नहीं होता

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श्री महेंद्र सिंह की ग़ज़ल साभार प्रस्तुत