समुन्दर इतना उबलेगाकिसे मालूम था पहले
किसी का दम यूँ निकलेगा
किसे मालूम था पहले
कभी पत्थर पिघलता था
किसी की आह से घायल
मगर इंसां न पिघलेगा
किसे मालूम था पहले
=======================
श्री आर.पी.'घायल' की रचना साभार.
रोया हूँ मैं भी किताब पढ़कर
कष्टों में ही मानवीयता का ज्ञान होता है,