Saturday, September 6, 2008

है कौन यहाँ अपना...?


है कौन यहाँ अपना

और कौन है पराया ?

मँझधार है कहाँ पर

किस ठौर है किनारा ?

दिन हों खुशी के बेशक

सब साथ निभाते पर

दुर्दिन में साथ जो दे

वो ही तो है हमारा !
===============

8 comments:

राज भाटिय़ा said...

च्न्दर कुमार जी आप ने सही कहा जो दुख मे साथ दे वही अपना सच्चा साथी होता हे.
धन्यवाद

मीत said...

बहुत खूब सर जी.

वैसे "दुर्दिन में जो साथ दे .. " ये किस के दुर्दिन की बात कर रहे हैं आप ? और किस के साथ की ? कौन देता है साथ सर, दुर्दिन में ? अपने दुर्दिन की दुहाई दो, आप के दुर्दिन की मजाक उडाओ किसी न किसी बहाने से ... शायद स्वार्थ के लिए .... ऐसे में आप कोई अपना ढूंढ रहे हैं ??

संदेश बहुत अच्छा है भाई ..... काश !!!!!

MANVINDER BHIMBER said...

bahut hi achcha likha hai...bhaaw bhi achach hai....
achcha laga

Richa Joshi said...

दुर्दिनों में तो साया भी साथ छोड़ जाता है।

श्रीकांत पाराशर said...

Dr saheb, rachna kafi achhi lagi.chhoti si rachna men kitni badi baat kahi gai hai. ek kavi isse jyada aur kya kah sakta hai?

Udan Tashtari said...

दुर्दिन में साथ जो दे
वो ही तो है हमारा !


--बहुत सही सीख!!!

आभार-आपकी रचनाओं में हमेशा कुछ उम्दा संदेश होता है, जारी रहें.

Dr. Chandra Kumar Jain said...

आभार आप सब का
================
चन्द्रकुमार

अनुराग said...

bahut khoob......