Friday, June 5, 2009

घास मिट्टी की उजास है...!

आप पहाड़ पर हैं

तो आ जाएँ नीचे

आप ज़मीन पर हैं

तो आइये ऊँचाई पर

पहाड़ की सुगंध

क्या साथ आई है आपके ?

या आप उठा लाए हैं पहाड़ !

ज़मीन की घास पर न रखें पहाड़

उसे रहने दें यूँ ही

घास मिट्टी की उजास है

और पहाड़ नदियों का पिता।

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अनीता वर्मा की कविता साभार.

8 comments:

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

badhiya prastuti . dhanyawad..

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर

"अर्श" said...

BAHOT HI KHUBSURAT KAVITA JO JEEVAN KO Marg darshit karti hui..


http://www.sahityashilpi.com/2009/06/blog-post_1136.html

arsh

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया!!

दीपा सिंह said...

बहुत सुन्दर कह सकते हैँ

शरद कोकास said...

धन्यवाद डॉ.चन्द्रकुमार जैन..अच्छी अच्छी कविताएं ला रहे हो भाई.

नीरज गोस्वामी said...

जैन साहेब बहुत उम्दा रचना पढ़वाई आपने...बहुत बहुत आभार आपका...
नीरज

Dr. Amar Jyoti said...

सुन्दर!