Thursday, November 4, 2010

छंद है दीपावली...!


अँधेरे के आवरण पर आघात है दीपावली
कुभाव-कुदृष्टि पर तुषारापात है दीपावली
जागरण है, चेतना-विश्वास है दीपावली
सदभाव के सदैव बिलकुल पास है
दीपावली
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धन से धर्म का अनुबंध है दीपावली
ख़ुद की हस्ती का जैसे छंद है दीपावली
ज्ञान का विवेक से संबंध है दीपावली
रौशनी को जीने का एक ढंग है
दीपावली
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8 comments:

Suman said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाईl

Sanjeet Tripathi said...

आपको भी दीप पर्व की बधाई और शुभकामनाएं

राज भाटिय़ा said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

संगीता पुरी said...

दीपावली का ये पावन त्‍यौहार,
जीवन में लाए खुशियां अपार।
लक्ष्‍मी जी विराजें आपके द्वार,
शुभकामनाएं हमारी करें स्‍वीकार।।

Udan Tashtari said...

सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

-समीर लाल 'समीर'

रंजना said...

वाह...क्या बात कही....

सचमुच ऐसी ही तो है दीपावली...

बहुत ही सुन्दर रचना...

सतीश सक्सेना said...

बहुत दिन बाद आ सका क्षमा चाहता हूँ !
आपका प्रसंशक बनाना चाह रहा हूँ ताकि भविष्य में लगातार पढ़ सकूं ! कृपया फोलोअर विजेट लगायें !! शुभकामनायें !

Avtar Meher Baba said...

बहुत सुन्दर...

सस्नेह
आपका ही
चन्दर मेहेर
इंग्लिश की क्लास