Friday, March 14, 2008

जितना दर्द मुझे तुम दोगे ...

जितना दर्द मुझे तुम दोगे मैं उतने ही गीत लिखूंगा
शोर मचाओ तुम कितना भी पर मैं तो संगीत रचूंगा
सीख लिया है मैंने जीना पथ की अनगिन बाधाओं से
रोको चाहे मुझे कहीं भी मैं मंजिल पर जीत लिखूंगा

6 comments:

mehek said...

bahut khub

Sanjeet Tripathi said...

क्या बात है, बहुत खूब!!

मीत said...

वाह साहब. बहुत बढ़िया.

नीरज गोस्वामी said...

"रोको चाहे मुझे कहीं भी मैं मंजिल पर जीत लिखूंगा"
कितनी सकारात्मक सोच से भरी हैं आप की पंक्तियाँ वाह वा...आनंद आ गया. यूँ ही मार्ग दर्शन करते रहें.
नीरज

रवीन्द्र प्रभात said...

बहुत खूब!!बहुत सारगर्भित , बहुत सुंदर !!

anitakumar said...

बढ़िया