Saturday, January 10, 2009

सबसे बड़ी नेमत...!

किसी की चाह में जीना

किसी की राह में चलना

किसी की याद में घुलना

किसी की बात में रमना

मुनासिब है चलो माना

किसी साँचे में भी ढलना

मगर सबसे बड़ी नेमत

मेरी नज़रों में है मित्रों !

कठिन हो जब समय तब चुप

किसी की आह को सुनना...!

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7 comments:

shelley said...

कठिन हो जब समय तब चुप

किसी की आह को सुनना...!

bahut khub.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

आप को पढ़ना हमेशा अच्छा लगता है।

"अर्श" said...

जैन साहब नमस्कार,
बहोत खूब लिखा है आपने आखिर में मानवता का पाठ पद्य बहोत खूब ,बहोत बढ़िया रचना पढ़ा ...
मेरी नई ग़ज़ल पे आपकी टिप्पणी का इंतजार रहेगा ...

अर्श

अजित वडनेरकर said...

बेहतरीन
सकारात्मक ऊर्जा से
भरपूर...
वाह..

mehek said...

bahut sahi kaha,sundar

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर.आप शव्दो के जादुगर लगते है.
धन्यवाद

vandana said...

sab kuch ho sakta hai magar kisi ke gam ko bantna har kisi ke baski bat nhi.......bahut achchi rachna