Monday, January 12, 2009

वही युवा है...!

वही युवा है जिसके मन में
कर्म-कुशल विश्वास है
भंग हुआ उत्साह तो समझो
विकट बुढ़ापा पास है
कोई यौवन में भी यदि
हो थका हुआ तो बूढा है
गति की सन्मति नहीं रही
तो समझो जन्म अधूरा है
बूढ़ी आँखों में जिस पल
जीने की ललक झलकती है
लगता है जैसे उस पल
सज़दा करता आकाश है !
वही युवा है जिसके मन में
कर्म-कुशल विश्वास है।
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8 comments:

विनय said...

आपका सहयोग चाहूँगा कि मेरे नये ब्लाग के बारे में आपके मित्र भी जाने,

ब्लागिंग या अंतरजाल तकनीक से सम्बंधित कोई प्रश्न है अवश्य अवगत करायें
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

anuradha srivastav said...

उम्दा लेखन........ मनःशक्ति ही सबसे बडा सम्बल है।

Amit said...

bahut accha likha hai...

Dr. Amar Jyoti said...

बहुत सटीक।'मन के हारे हार है,मन के जीते जीत'।

रंजना said...

बिल्कुल सही कहा आपने......सुंदर और उत्साहवर्द्धक रचना हेतु साधुवाद

राज भाटिय़ा said...

वही युवा है जिसके मन में
कर्म-कुशल विश्वास है
बिलकुल सही कहा आप ने.
बहुत ही सुंदर भाव, सुंदर कविता.
धन्यवाद

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

आपने तो जवानी नापने का मीटर बना दिया। नापते हैं अपनी जवानी/बुढ़ापा।

"अर्श" said...

बहोत खूब और बेहतर तरीके से आपने सिधांत को सामने रखा है बहोत ही बढ़िया जैन साहब.. ढेरो बधाई कुबूल करें....

आभार
अर्श