Friday, April 10, 2009

फूलों वाले रिश्ते...!


निकल जाए कांटा, काँटे से

फिर भी कभी न भूलें हम

फूलों वाले रिश्तों को

काँटों से कभी न तौलें हम

शब्दों में मीठापन चाहे

मत घोलें पर याद रहे

अन्तर आहत करने वाली

वाणी कभी न बोलें हम

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