Sunday, April 6, 2008

हो जाते हैं क्यों लोग पराए !

आँसू किसी गरीब के पलकों से उठाए
वो शख्स मेरे साथ चले शौक से आए

जिसने किसी के वास्ते मांगी नहीं दुआ
मुमकिन नहीं वो मेरा कभी साथ निभाए

होंठों पे जिनके गीत थे अब खो गए कहाँ
लय उनकी ज़िंदगी की कोई फिर से मिलाए

जलना है तो यूं जल की उजाला हो प्यार का
जलता हुआ दीपक ये सबक सब को सिखाए

कितने हैं ऐसे लोग जिन्हें ये नहीं मालूम
मुँह फेर के हो जाते हैं क्यों लोग पराए

जो फूल थे काँटों का असर उनमें आ गया
क्या हो गया इन्सां को कोई ये तो बताए

जो कारवां के साथ शरीके सफर न थे
मंजिल पे जो पहुँचा तो वही सामने आए

Saturday, April 5, 2008

वेतन पहले,वतन बाद में !

नई सदी है सिर पर चोटी कहाँ मिलेगी ?
नई सदी है कटि पर धोती कहाँ मिलेगी ?
वेतन पहले, वतन बाद में जब आता हो
तब बोलो मेहनत की रोटी कहाँ मिलेगी ?

Friday, April 4, 2008

जीत है ये जिंदगी

छंद में गर जी सको तो गीत है ये ज़िंदगी,
हो अगर स्वच्छंद तो विपरीत है ये ज़िंदगी.
सुन सको गर मौन को संगीत है ये जिंदगी,
हार में भी हँस सको तो जीत है ये जिंदगी.

जिन्दगी हमने गुजारी शान से .

बच गए खुदगर्ज़ लोगों के किसी एहसान से
चार दिन की जिन्दगी हमने गुजारी शान से

अक्लमन्दों में रहो तो अक्लमन्दों की तरह
और नादानों में रहना हो रहो नादान से

वो जो कल था और अपना भी नहीं था दोस्तों
आज को लेकिन सजा लो एक नई पहचान से

सिर्फ़ बातों से संवरती तो नहीं है जिन्दगी
इल्मो -हिकमत से निखरती है निराली शान से

दिल जलाओगे तो होगी जिन्दगी में रौशनी
इस ज़माने का तकाज़ा है यही इंसान से

दोस्तों रोते रहे तो कुछ न पाओगे यहाँ
जिन्दगी खिलती है लेकिन गीत से गान से

Wednesday, April 2, 2008

बदलो दर्पण !

अब बदल जाओ दर्पण
ये इक्कीसवीं सदी है
देखो सब बदल गए
और तुम ...... दर्पण ही रह गए !
हर चीज़ को
जस का तस दिखाने की
आदत से कब बाज आओगे ?
आदमी की तरह क्या
सच को नहीं छुपाओगे ?
कुछ तो छुपाने की कला सीखो
अरे जो है उसे मारो गोली
जो नहीं दिखती वही सूरत है भोली
इसलिए ना-कुछ को कुछ बनाकर दिखाओ
दर्प न करो दर्पण जरा झुक जाओ .....!!!

रवानी साथ रख लेना .

मोहब्बत का नया अंदाज़ जानी साथ रख लेना
सफर में संग चलने की कहानी साथ रख लेना

बहुत आसान है लड़ना सफर की गर्दिशों से पर
जरा पक्का इरादा और जवानी साथ रख लेना

नहीं आसां पहुँचना मंजिलों पर भूल मत जाना
क़दम अपने उठाओ तो रवानी साथ रख लेना

हमेशा झूठ कहने से कभी इज्ज़त नहीं मिलती
तुम अपने साथ थोड़ी हकबयानी साथ रख लेना

मिलेंगे फूल कम काँटे ही ज्यादा साथ में होंगे
झटक कर हर मुसीबत शादमानी साथ रख लेना

Tuesday, April 1, 2008

ताज झूठ के सर पर देखो !

किस्मत का ये चक्कर देखो
चांदनी घर से बेघर देखो

सड़कों पर बिखरा उजियारा
और अँधेरा घर पर देखो

सौ-सौ आंसू बहा रहे हैं
शिलान्यास के पत्थर देखो

बाबू अफसर सभी नदारद
ऐसा भी तुम दफ्तर देखो

आज के बच्चों के हाथों में
कारतूस और खंज़र देखो

सच का चेहरा उतरा -उतरा
ताज झूठ के सर पर देखो .