"अपनी बुनी चदरिया है यहबिखर गई तो सी लेता हूँ "गागर में सागर.बहुत उम्दा...वाहबेहतरीन.
bahut achchi....bahut sundar....behatarin
Waah Saahab. Kyaa baat hai. bahut hi badhiyaa.
अमृत है यह, पी लेता हूँकैसा बोझ,विवशता कैसीसब अपना है ताना-बानाअपनी बुनी चदरिया है यहबिखर गई तो सी लेता हूँ बहुत सुन्दर भावों से लबालब कविता।
बहुत उम्दा...बहुत सुन्दर.
वाह वाहबहुत सुंदर.
अपनी बुनी चदरिया है यहबिखर गई तो सी लेता हूँ इस बिखरे तो समेटना .सब नही कर पाते ...अच्छा लिखा आपने
ह्रदय के अतल से आभार आप सब के स्नेह का.==================डा.चन्द्रकुमार जैन
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8 comments:
"अपनी बुनी चदरिया है यह
बिखर गई तो सी लेता हूँ "
गागर में सागर.
बहुत उम्दा...वाह
बेहतरीन.
bahut achchi....
bahut sundar....
behatarin
Waah Saahab. Kyaa baat hai. bahut hi badhiyaa.
अमृत है यह, पी लेता हूँ
कैसा बोझ,विवशता कैसी
सब अपना है ताना-बाना
अपनी बुनी चदरिया है यह
बिखर गई तो सी लेता हूँ
बहुत सुन्दर भावों से लबालब कविता।
बहुत उम्दा...बहुत सुन्दर.
वाह वाह
बहुत सुंदर.
अपनी बुनी चदरिया है यह
बिखर गई तो सी लेता हूँ
इस बिखरे तो समेटना .सब नही कर पाते ...अच्छा लिखा आपने
ह्रदय के अतल से आभार
आप सब के स्नेह का.
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डा.चन्द्रकुमार जैन
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