Thursday, August 7, 2008

तुलसी जयंती.

जगत् को मर्म जीने का

सिखाया राम में जीना

अडिग रहना सिखाया और

बताया भक्ति-रस पीना

वचन की आन रखने और

स्वयं को जीतने की धुन

न तुम होते बताता कौन

जीवन-गान में जीना
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9 comments:

अनुनाद सिंह said...

... और जिसने सबसे महान बात कही:

कीरति भनिति भूति भलि सोई।
सुरसरि सम सब कहँ हित होई।।

Dr. Chandra Kumar Jain said...

अनुनाद जी,
आपने सच कहा.
गोस्वामी जी सर्व मंगल
के ही गायक हैं.
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डा.चन्द्रकुमार जैन

Shiv Kumar Mishra said...

सुंदर और सटीक. तुलसीदास जी का लेखन अनंतकाल तक प्रासंगिक रहेगा.

vipinkizindagi said...

सुंदर

बालकिशन said...

सुंदर और सटीक. तुलसीदास जी का लेखन अनंतकाल तक प्रासंगिक रहेगा.

Dr. Chandra Kumar Jain said...

बिल्कुल सही
कालजयी है भारत गौरव
भारती कंठ तुलसीदास जी की
लेखनी का वैभव.
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आभार
डा.चन्द्रकुमार जैन

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर.

Dr. Chandra Kumar Jain said...

आभार समीर साहब
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डा.चन्द्रकुमार जैन

Hindi Choti said...


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