Sunday, August 24, 2008

इंसान कौन...?


लहर जो बहके

वही तूफान है

जो मिले बिन चाह

वह वरदान है

राह पर तो पाँव

चलते हैं सभी

जो बना ले राह

वह इंसान है
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7 comments:

pallavi trivedi said...

bahut badhiya..aapki rachnaayen hamesha prerak hoti hain.

सुशील कुमार छौक्कर said...

बहुत ही उम्दा। जोश भरती हुई।

Hari Joshi said...

इंसान आैर इंसानियत को बहुत सहजता से समझाया है आपन। साधुवाद।

Dr. Chandra Kumar Jain said...

पल्लवी जी
सुशील जी
जोशी जी
आभार आप सब का.
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डॉ.चन्द्रकुमार जैन

अभिषेक ओझा said...

परिभाषा अच्छी लगी और आपका अंदाज भी.

राजीव तनेजा said...

आगे बढ अपना रास्ता खुद बनाने की प्रेरणा देती आपकी कविता अच्छी लगी

रज़िया "राज़" said...

राह पर तो पाँव
चलते हैं सभी
जो बना ले राह
वह इंसान है=============
वाह! क्या खूब कहा है आपने? बधाई स्वीकारें।