Wednesday, September 3, 2008

रौशन हो हर घर...हर कोना !

सिर्फ़ बाढ़ में घर न डूबे

डूब गए जीवन के सपने

जो घिर गए, उबर जो पाए

आखिर हैं दोनों ही अपने

हाथों पर जिनको पाया है

कांधों पर बेवक्त न खोना

है बस यही दुआ इस दिल की

रौशन हो हर घर, हर कोना

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7 comments:

नीरज गोस्वामी said...

है बस यही दुआ इस दिल की
रौशन हो हर घर, हर कोना
आमीन......
नीरज

Anil Pusadkar said...

aaj un logon ko sab jyada zarurat duaon ki hi hai,aabhar aapka.achhi rachana

अभिषेक ओझा said...

"है बस यही दुआ इस दिल की

रौशन हो हर घर, हर कोना"

bas ham bhi yahi dua karte hain.

Udan Tashtari said...

हाथों पर जिनको पाया है

कांधों पर बेवक्त न खोना

है बस यही दुआ इस दिल की

रौशन हो हर घर, हर कोना

--प्रार्थना में हम भी शामिल हैं आपके साथ.

राज भाटिय़ा said...

सिर्फ़ बाढ़ में घर न डूबे

डूब गए जीवन के सपने
बहुत ही भावुक कविता, ओर हो भी तो यही रहा हे, कितने संकट मे होगे यह लोग क्या बीत रही होगी उन पर.
है बस यही दुआ इस दिल की
रौशन हो हर घर, हर कोना
भगवान यही बात सुन ले
धन्यवाद

Dr. Chandra Kumar Jain said...

आभार आप सबकी सद्भाव पूर्ण
सहभागिता के लिए.
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चन्द्रकुमार

Dr. Amar Jyoti said...

पर-दुख कातरता की सफल अभिव्यक्ति।