Saturday, November 22, 2008

बजाए कौन शहनाई ...!

मिलन से पूर्व क्यों होता

यहाँ आना विदाई का !

बताओ पार पाया कौन

विधि की विकट खाई का !!

व्यथा की यह कथा सुनकर

धरा मन में ही मुस्काई !

मिले अरमान मिट्टी में

बजाए कौन शहनाई !!

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7 comments:

संगीता पुरी said...

bahut achha likha hai.

परमजीत बाली said...

सुन्दर रचना है।बधाई।

अभिषेक ओझा said...

'विधि की विकट खाई' सुंदर !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

युक्तियाँ इंन्सान ने बहुत लगाई
एक कोई विधि को न जीत पाई

अशोक पाण्डेय said...

अच्‍छी प्रस्‍तुति.. आभार।

सतीश सक्सेना said...

वाकई में ! बहुत खूब डॉ साहब !

अनुपम अग्रवाल said...

व्यथा परिभाषित हुई
बजाए कौन शहनाई
मिले अरमान मिट्टी में
विधि ने विधि अपनाई