Thursday, January 8, 2009

करिए जरा विचार...!

जितना देख सकेंगे उतना

विस्तृत है संसार

नीर-क्षीर का हो विवेक तो

निश्चित है उद्धार

जब तक सीमित है अपने तक

अपने 'सच' का सार

कैसे समझ सकेंगे जग को

करिए जरा विचार...!

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6 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

मुश्किल है समझना इस को
जग का विस्तार है अपार।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

इस सच को समझना मुश्किल है जरा

dwij said...

जितना देख सकेंगे उतना

विस्तृत है संसार

नीर-क्षीर का हो विवेक तो

निश्चित है उद्धार

बिल्कुल सच कहा
और खूबसूरत बात यह कि
बहुत खूबसूरत ढंग से कहा.
नव वर्ष के लिए मंगल कामनायें
!
द्विजेन्द्र द्विज्

विवेक सिंह said...

ठीक है जी विचार करते है !

अभिषेक ओझा said...

'जितना देख सकेंगे उतना
विस्तृत है संसार' बिल्कुल सही बात है.

रंजना said...

वाह ! सुन्दर कही है !