Saturday, April 25, 2009

वतन के लिए मर...!

चंदन के लिए मर
किसी कंचन के लिए मर
चाहे तू किसी रूप के
दर्पण के लिए मर
लेकिन तेरा मरना तो
कोई मौत नहीं दोस्त
मरना ही है तो शान से
वतन के लिए मर।
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श्री मुकुंद कौशल की रचना साभार

4 comments:

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

नमस्कार,
इसे आप हमारी टिप्पणी समझें या फिर स्वार्थ। यह एक रचनात्मक ब्लाग शब्दकार के लिए किया जा रहा प्रचार है। इस बहाने आपकी लेखन क्षमता से भी परिचित हो सके। हम आपसे आशा करते हैं कि आप इस बात को अन्यथा नहीं लेंगे कि हमने आपकी पोस्ट पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की।
आपसे अनुरोध है कि आप एक बार रचनात्मक ब्लाग शब्दकार को देखे। यदि आपको ऐसा लगे कि इस ब्लाग में अपनी रचनायें प्रकाशित कर सहयोग प्रदान करना चाहिए तो आप अवश्य ही रचनायें प्रेषित करें। आपके ऐसा करने से हमें असीम प्रसन्नता होगी तथा जो कदम अकेले उठाया है उसे आप सब लोगों का सहयोग मिलने से बल मिलेगा साथ ही हमें भी प्रोत्साहन प्राप्त होगा। रचनायें आप shabdkar@gmail.com पर भेजिएगा।
सहयोग करने के लिए अग्रिम आभार।
कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
शब्दकार
रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया!मरना ही है तो शान से
वतन के लिए मर।

Anil said...

काश यह बात हमारे नेता समझ पाते ।
या हम ही समझकर नेता बन जाते ।।

Hindi Choti said...


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