Friday, May 1, 2009

लीक पर वो चलें...!

लीक पर वो चलें
जिनके चरण दुर्बल
और हारे हैं
हमें तो अपनी ही यात्रा से बने
ऐसे अनिर्मित पथ ही प्यारे हैं।
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श्री सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की
कविता साभार।

4 comments:

"अर्श" said...

shri sarveshvar dayaal ji ki kavita padhwaane ke liye aapka dero aabhaar..

meri nayee gazal pe aapka sneh aur aashirvaad chahunga..
aajkal aap mere se khafaa hai aisa pratit hota hai..


arsh

अल्पना वर्मा said...

हमें तो अपनी ही यात्रा से बने
ऐसे अनिर्मित पथ ही प्यारे हैं।

--स्वाभिमान को बल देती हुई पंक्तियाँ.

abhaar.

Udan Tashtari said...

बहुत आभार इस प्रस्तुति का.

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर said...

लीक पर वो चलें
जिनके चरण दुर्बल

बहुत सुन्दर एवम भाव पुअर्ण अभिव्यक्ति के लिऐ बधाई

हे प्रभु यह तेरापन्थ

मुमबई टाईगर