Friday, May 2, 2008

न डरना ग़म से तुम.


कभी हँसना, कभी रोना
ये तो बस आम बातें हैं
न डरना ग़म से तुम
ये गम बड़े ही काम आते हैं
कभी जब वक्त का दरिया
लगे तूफ़ान से लड़ने
तो गम के अश्क ही
कश्ती को यारों थाम लाते हैं.