Thursday, November 27, 2008

हर सुमन में सुरभि का वास नहीं होता !

हर सुमन में सुरभि का

वास नहीं होता,

हर दीपक का मनहर

प्रकाश नहीं होता।

हर किसी को प्राण अर्पित

किए जा सकते नहीं,

हर जीवन में मुस्काता

मधुमास नहीं होता।।

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5 comments:

sanjay jain said...

आदरणीय डा. सा. रचना बहुत सुंदर लिखी है - हर जीवन में मुस्काता मधुमास नहीं होता।। हर सुमन में सुरभि का वास नहीं होता / कबीरदास की रचना याद आती है की हर हाथी में मोती नहीं होते , हर पर्वत पर चंदन नहीं होते ,हर चमकती हुई वस्तु हीरा नहीं होती और हर हिरन में कस्तूरी नहीं होती / व्यक्ति अपने कर्मो को सुधार कर ही इस भव सागर से तीर सकता है / कोई भी व्यक्ति जन्म से महान नहीं होता सभी अपने कर्मो से ही महान बनते है /

BrijmohanShrivastava said...

डॉ साहेब
हर चांदनी रात में इंतज़ार नहीं होता
हर आशिक दमदार नहीं होता
हर पति वफादार नहीं होता

नीरज गोस्वामी said...

सच कहा आपने....जैन साहेब.
नीरज

अशोक मधुप said...

बहुत अच्छा मुकतक

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर है आप की कविता.
धन्यवाद